Skip to main content

BHOOK HADTAAL NOTES ( भूख हड़ताल - श्री बाल शौरी रेड्डी )

1.भूख हड़ताल (कहानी)

                                                                                    - श्री बाल शौरी रेड्डी


लेखक परिचय:

बालशौरी रेड्डी जी का जन्म जुलाई 1928 कड़पा जिला में हुआ। दक्षिण में हिंदी को समृद्ध बनाने में बालाशौरी रेड्डी जी का योगदान है। इनकी मातृभाषा तेलुगु होने पर भी इन्होंने हिंदी में रचनाएँ की है। 14 उपन्यास ,12 नाटक, कहानियाँ , संस्मरण और संस्कृति एवं साहित्य से संबंधित कई रचनाएं की है। शबरी, वीरकेसरी, धरती मेरी माँ इनकी रचनाएं हैं । उन्होंने 23 साल तक हिन्दी "चंदमामा" पत्रिका का सफल सम्पादन भी किया है।


प्रश्न और उत्तर:

1. भूख हड़ताल कहानी का सारांश लिखिए ?

ज: कहानीकार का परिचय :

बालशौरी रेड्डी जी का जन्म जुलाई 1928 कड़पा जिला में हुआ। दक्षिण में हिंदी को समृद्ध बनाने में बालाशौरी रेड्डी जी का योगदान है। इनकी मातृभाषा तेलुगु होने पर भी इन्होंने हिंदी में रचनाएँ की है। 14 उपन्यास ,12 नाटक, कहानियाँ , संस्मरण और संस्कृति एवं साहित्य से संबंधित कई रचनाएं की है। शबरी, वीरकेसरी, धरती मेरी माँ इनकी रचनाएं हैं । उन्होंने 23 साल तक हिन्दी "चंदमामा" पत्रिका का सफल सम्पादन भी किया है।

सारांश :

भूख हड़ताल – श्री बालशैरी रेड्डी जी की बहु चर्चित कहानी है। जो तत्वों के आचारण पर अत्यंत सफल रही हैं। इससे स्वाभिमान जीवन बिताने वाले एक लकड़हारे की कथा व्यथा का अंकन हुआ है। लेखक किसी मीटिंग में जाने के लिए बस स्टैंड पहुंचते हैं। लेकिन हड़ताल के कारण वहां कोई वाहन दिखाई नहीं देता। इतने में एक लकड़हारा नारायण से लेखक की मुलाकात होती है। नारायण जलावन खरीदने के लिए लेखक से पूछता है, लेकिन लेखक अपनी विवशता प्रकट करता है। फिर सी लेखक उसे  दो रूपये देने लगता है, लेकिन नारायण इनकार करता है। और अपनी कथा व्यथा सुनने लगता हैं। वह स्वाभिमान जीवन बिताना चाहता है। और इमानदार बनकर जीना चाहता है।

इस कहानी का वातावरण अत्यंत सहज है। आधुनिक राजनीतिक जीवन की झांकी इसमें दिखाई देता है। लेखक अदभुत दंग से आज की परिस्थितियों का चित्रण किया है। कहानीकार का प्रमुख उद्वेश्य आज के समाज एवं निम्न वर्ग की मन स्धिति का विशद वर्णन करना। 

इसमें लेखक को समाज में रहने वाले अनपढ़ लोगो की दयनीय स्थिति का वर्णन किया गया है। नारायण लेखक से कहता है कि अनपढ़ लोग सिर्फ वोट देने का काम आते हैं, लेकिन उन्हें कोई नौकरी नहीं मिलती। यह चर्चनीय विषय है। समाज के शिक्षित – अशिक्षित दोनों प्रकार के लोगों का ध्यान सरकार को करना चाहिए। लेकिन सरकार सिर्फ शिक्षित लोगो को ही नौकरी देती है। और लकड़हारे के पत्र के द्वारा रोज मद्य जीवन की कटिनाओ का सम्पूर्ण चित्रण अनेखों ढंग से किया गया है। नारायण कहता है – जंगल से लकड़ियां लाते समय वहां का गार्ड गालियां देता है। लेकिन गुस्से में उसे मार नहीं सकता। ऐसा करने पर उसका परिवार अनाधा हो जायेगा। लेकिन सरकारी आफिसर जंगल से चंदन की लकड़ियां काटकर चोरी से बेच देते हैं। इसपर कोई भी आवाज नही उठाता।

अंत में लेखक से अनुरोध करता है की – अगर भूख भी हड़ताल करे तो क्या ही अच्छा होगा। इससे समाज में व्याप्त गरीब, निर्धन एवं निस्सहाय लोगों का अत्यंत महत्वपूर्ण वर्णन मिलता है।

विशेषताएँ :

* कहनी का शीर्षक अत्यंत रोचक एवं मर्मस्पर्शी है ।

* लेखक की भाषा सरल है, एवं भाव गंभीर है।

* लेखक का वर्णन अद्भुत है।

* एक लकड़हारे के माध्यम से उस समय की समस्याओं को उजागर करने में लेखक 100% सफल हुए हैं।

* यह एक सामाजिक चेतना दिलाने वाली कहानी है।

* समाज में हमें लेखक और लकड़हारे जैसे चरित्र वाले लोग दिखायी देते हैं।

* कहानी को प्रस्तुत कने का ढंग सहज एवं सुंदर है ।


2. अधेड़ आदमी ‘नारायण’ का चरित्र चित्रण कीजिए।

ज:भूख हड़ताल श्री बालशैरी रेड्डी जी की एक सामाजिक कहानी है। जिसमें एक स्वाभिमान जीवन बिताने वाला एक लकड़हारे की मानो भावना और उसकी कथा-व्यथा का मर्मस्पर्शी चित्रण है।

आशावादी दृष्टिकोण : कहानी के आरंभ में लेखक सुबह सवेरे पांच बजे तैयार होकर बस स्टैंड पहुंचते है। लेकिन वहां कर्मचारियों के हड़ताल के कारण सरकारी- गैरसरकारी वाहन नहीं मिलते। सब कुछ सूना -सूना दिखाई देते है। इतने में लेखक की और आस भरी नजरो से कहानी का मुख्य पत्र नारायण राव वहां पहुंचता है। वह लेखक से अनुरोध करता है कि जलावन खरीदे। आज कुछ व्यापार भी नही हुआ। लेकिन लेखक जलावन खरीदने अपनी आशक्ता प्रकट करना है। और नारायण को तसल्ली देने के लिए उसे दो रूपये देने लगता हैं, लेकिन नारायण स्वीकार नहीं करता।

स्वाभिमानी : इस कहानी में नारायण का पात्र एक स्वाभिमान एवं आत्मनिर्भर लकड़हारे के रूप में अत्यंत अदभुत दंग में चित्रण किया गया है। हड़ताल होनी पर भी अपनी जीविका चलाने हेतु जलावन लेकर बस स्टैंड पहुंचा है। लेखक के पैसे लेने से इनकार करदेता हैं। क्योंकि वह भिखमंगा नहीं है। उसमें स्वाभिमान की भावना झलकती है। चाहे वह अधेड़ उम्र का आदमी ही क्यों न हो फिरभी जब तक अपने हाथ पैर में शक्ति है, वह मेहनत करके अपने परिवार को जीविका पहुंचाएगा। और उसकी मृत्य के बाद चाहे उसका परिवार कुत्ते की मौत मरे उसकी चिंता नहीं है।

दुख और दर्द को झेलना : लेखक से बातचीत पर वह अपनी व्यथा सुनाता है कि किस तरह उसे जंगल से लकड़ियां लाने में कडी नाई होती हैं। और गार्ड से झगड़ा भी हो जाता है, फिर भी वह अपने परिवार के लिए और इस पापी पेट के लिए सब कुछ सहलन करता हैं। वह ईमानदारी के साथ जीवन चाहता है। लेकिन उसे जीने का रास्ता दिखाई नहीं देता। वह चाहता है कि भूख भी हड़ताल करे, तो क्या ही अच्छा होगा। लेखक के द्वारा नारायण पत्र का चित्रण अत्यंत मर्मस्पर्शीय ढंग से वर्णन किया गया है। वर्तमान में भी समाज में नारायण जैसे लोग हमें दिखाई देते हैं।


3. भूख हड़ताल में वर्णित सामाजिक वर्णन का उल्लेख कीजिए। (OR)

कहानी तत्वों के आधार पर 'भूख हड़ताल' कहानी की समीक्षा कीजिए ?


ज )भूख हड़ताल कहानी में उस समय की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों का जीता जागता चित्र प्रस्तुत किया गया है । समाज में कोई सरकारी विभाग वाले हड़ताल करते हैं ,तो उसका आम जनता पर जो प्रभाव पड़ता है इसका सजीव वर्णन किया गया है । कहानी में परिवहन विभाग वाले हड़ताल करने के कारण कहानीकार को बहुत परेशान होना पड़ा क्योंकि उसे एक मीटिंग में जाना है, जिसमें मंत्री भी आने वाले हैं । उस मीटिंग में उसे "प्रौढ़ शिक्षा की समस्याएं और निदान" के विषय पर भाषण देना है । इसी बीच में जलावन बेचकर जीवन बिताने वाला एक लकड़हारा नारायण भी बहुत निराश होता है । क्योंकि लकड़ियां नहीं बिकती तो उसके परिवार वालों को भूखा रहना पड़ता है। इस प्रकार इस जैसे कई जरूरतमंद लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने से रुक जाते हैं।

कहानी में यह भी बताया गया है कि हमें स्वतंत्र होकर इतना समय बीतने पर भी गरीब लोगों के जीवन में कोई परिवर्तन नहीं आया। आज भी इस देश में लाखों और करोड़ों लोग भूखे ,नंगे और बीमार है। आर्थिक असमानताएं दूर नहीं हुई । सरकारी दफ्तरों मैं फैले हुए भ्रष्टाचार का भी वर्णन किया गया है। कहानी में नारायण लकड़ियां काटने जंगल जाने पर जंगल का गार्ड उससे मना करता है , मगर जब एक मोटर गाड़ी वाला अफसर रुपयों के नए बंडल देता है , खुद चंदन के लकड़ियां काटने के लिए दिखाता है, तो गार्ड बेझिझक वह पैसे ले लेता है । इससे पता चलता है कि समाज में भ्रष्टाचार एवं असमानताएं बहुत फैल चुकी है। सरकार चलाने वालों को चुनाव के लिए अनपढ़ लोगों की वोट की जरूरत होती है । लेकिन उन्हें काम दिलाने के बारे में कोई सोचता नहीं । भूख की ज्वाला जब शरीर को भस्म करने के लिए लप-लपाती है तब आदमी अंधा हो जाता है । तब वह पापी पेट भरने के लिए डाक डालता है,धोखा करता है दगा देता है । वह समाज में अशांति का कारण बनता है । अगर सरकार समय पर उनकी सहायता करती है तो वह बुरी राहें नहीं पकड़ता । कहानी में लकड़हारे के जीवन की इन समस्याओं का उल्लेख करते हैं । उनकी ही नहीं बल्कि समाज के सभी लोगों की समस्या है । कहानी के अंत में नारायण विरक्त भाव से यह कहता है की कमबख्त भूख भी हड़ताल करे तो क्या ही अच्छा होता की सारी समस्याएं हल हो जातीं।


Comments

Popular posts from this blog

वर्णमाला , मात्राएँ और बारहखड़ी

                                                                          〖  वर्णमाला  〗 👉 स्वर – अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ  👉 अनुस्वार – अं 👉 विसर्ग – अ: 👉 व्यंजन – क ख ग घ ङ                     च छ ज झ ञ                    ट ठ ड ढ ण                     त थ द ध न                    प फ ब भ म                    य र ल व                    श ष स ह                (क...

Our National Symbols 26 Jan 2024

 

कारक चिह्न

                                                                                                                                            कारक चिह्न   click here संज्ञा अथवा सर्वनाम को क्रिया से जोड़ने वाले चिन्ह (शब्द )परसर्ग या विभक्ति या कारक चिन्ह कहलाते हैं। कारक की परिभाषा –  वाक्य में  संज्ञा या सर्वनाम जिस रूप (कर्ता, कर्म,करण .. ) में आते हैं, उसे कारक कहते हैं। संज्ञा या सर्वनाम का जो रूप क्रिया से उनका संबंध दर्शाता है कारक कहलाता है।   संज्ञा और सर्वनाम पदों का क्रिया के साथ संबंध बताने वाले रूप को कारक कहते हैं...